महिलाएं घर और बाहर दोनों तरफ की जिम्मेदारियां उठा रही हैं। काम बहुत है लेकिन समय सीमित है। जिंदगी में लाएं ये बदलाव


दिक्कत यह है कि जब वे एक साथ सारे काम करना चाहती है तो काम बनने के बजाय बिगड़ जाते हैं। इसका असर मन-मस्तिष्क पर होने लगता है। जानिए कि खुद में बदलाव लाकर मन और मस्तिष्क की इस धुंध को कैसे दूर करें ....
 

कभी-कभी ऐसी स्थिति होती है कि ध्यान न तो किसी एक काम पर रहता है, न ही दिमाग चीजों को ठीक से याद रख पाता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में ब्रेन फॉग कहते हैं। लेकिन यह इन्हीं लक्षणों तक सीमित नहीं है। साफ शब्दों में कहा जाए तो जब मस्तिष्क की सोचने और एक जगह ध्यान लगा पाने की क्षमता प्रभावित हो जाती है तो उसे ब्रेन फॉग कहते हैं। इस समस्या का कारण है चिंता, नींद पूरी न होना या किसी बात को अधिक सोचना। किंतु कई मामलों में मल्टीटास्किंग यानी कि बहुत सारे काम एक साथ करने के कारण भी यह समस्या हो सकती है। खासतौर पर महिलाएं घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारियां निभाने के चक्कर में एक साथ कई काम पूरे करने की कोशिश में लग जाती हैं। इससे तनाव बढ़ता है और मस्तिष्क प्रभावित होता है। लिहाजा एक काम पूरा होता नहीं है कि दूसरा बिगड़ जाता है। चिड़चिड़ाहट होने लगती है। यदि आप भी कामकाज के दौरान ऐसा महसूस करती हैं, तो आपको कुछ देर ठहरकर दिमाग को आराम देने की जरूरत है
 

शोध कहता है कि...
तनावग्रस्त लोग दूसरों की तुलना में साधारण गतिविधियों को पूरा करने में न सिर्फ समय अधिक लेते हैं बल्कि उन्हें मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती है। ब्रेन फॉग के सभी कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आपकी मानसिक ऊर्जा को खपाते रहते हैं। फलतः आपके पास अन्य दैनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक ऊर्जा नहीं बचती और आप अकारण ही थके हुए और उलझन की स्थिति में रहते हैं।


कारण सिर्फ़ चिंता नहीं है...
चिंता या तनाव के अलावा ब्रेन फॉग होने के कई कारण हो सकते हैं। ये दैनिक क्रियाओं से जुड़े हुए हैं
स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग एक अध्ययन के मुताबिक स्क्रीन से निकलने वाली किरणें भूलने की आदत, असमय धक्कान, नींद न आना और भावनात्मक आचरण में बदलाव के लिए भी जिम्मेदार हैं।
 

अपर्याप्त नींद
स्वस्थ मस्तिष्क के लिए 7-8 घंटों की नींद आवश्यक है। किंतु घंटों विश्राम करने के बाद भी तरोताजा महसूस न करना या निरंतर विचारों के चलते रहने के कारण नींद पूरी न होना दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं दे पाता है जिसके कारण वेन फॉग की समस्या होने लगती है।                  

जिंदगी में लाएं ये बदलाव

 
एक-एक कर काम करें
अगर घर-परिवार और कामकाज की जिम्मेदया है तो एक साथ सारे काम करने की आवश्यकता नहीं है। काम को एक एक करके पूरा करें। सबसे जरूरी काम पहले कर लें। एक साथ दोन जैसे कि आमतौर पर महिलाएं एक तर दूधालने के लिए आंच पर रखी है और दूसरी तरफ मुड़कर सब्जी काटने में व्यस्त हो जाती हैं। ध्यान भटकने के कारण काम पूरा नहीं होता, उल्टा बिगड़ जाता है। बेहतर होगा कि एक काम पर ध्यान लगाया जाए, जिससे काम समय पर पूरा होगा और उलझन भी नहीं होगी।


मिसाल के लिए जब आप सब्जी बनाती हैं तो मसाले एक-एक करके नाप तोलकर डालती हैं। यदि इन्हें जल्दबाजी में डालेंगी तो स्वाद बिगड़ेगा यह तय है। इसी तरह सीढ़ी चढ़ने की भी प्रक्रिया होती है, जिसे लगाकर नहीं बि एक-एक क़दम ध्यान से रखकर ही चढ़ सकती हैंकाम को जितना ध्यान  माइंडफुलनेस के साथ करेंगी, काम उतनी ही आसानी से और जल्दी पूरा होगा।


काम से विराम लें

कई महिलाएं सुबह की चाय भी काम करते-करते पीती हैं। रुके बिना कोई भी कार्य करना दिमाग को थका सकता है। लिहाजा हर काम के बीच-बीच में दिमाग और शरीर को विराम दें। अगर सुबह के वक्त खाना बना रही हैं तो रोटी बनाने के बाद कुछ मिनट बैठकर चाय पी लीजिए। उसके बाद दूसरे काम की शुरुआत करें।


कुछ दिलचस्प करें
हर दिन कुछ समय सिर्फ खुद के लिए निकालें। इसमें संगीत सुनें, कुछ रचनात्मक सीखें। आडवार या किताब पढ़ने जैसी गतिविधियां, जिनमें आपकी दिलचस्पी हो, भी कर सकती हैं। इससे मन अच्छा होगा। नई प्रेरणा के संचार के साथ तनाव भी घटेगा।


अच्छी नींद ज़रूर लें
अगर रात में ठीक से नींद नहीं लेंगी, तो दिनभर दिमागी रूप से थकावट रहेगी। सोने का समय तय करें और आठ घंटे की नींद अवश्य लें। अगर किसी कारणवश रात को नींद पूरी नहीं हो पाती है तो दोपहर के वक़्त 15-20 मिनट की झपकी ले लें। ध्यान रहे, दोपहर में पूरी नींद न लें, अन्यथा रात की नींद गड़बड़ाएगी।


मन में कुछ न रखें।
किसी चिंताजनक विचार को मन में दबाकर रखने या बार बार सोचकर तनाव लेने से बेहतर है कि आप उसे परिजनों या विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करें। इससे तनाव कम होगा और मन हल्का रहेगा। लोगों के साथ मिलने-जुलने से भी दिमाग की उलझन दूर होगी।


व्यायाम या सैर करें
सुबह के वक्त व्यायाम करें। यदि व्यायाम न कर सकें तो सुबह या शाम के समय खुली हवा में सैर करें। इससे मन और मस्तिष्क को आराम मिलेगा। शारीरिक कसरत भी हो जाएगी। थोड़ा समय ध्यान लगाने के लिए भी निकाल सकती हैं।


 

 




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