एरोबिक और एनारोबिक रनिंग क्या होती हैं?

 प्रश्न : एरोबिक और एनारोबिक रनिंग क्या होती हैं? इनकी पहचान क्या है? इनके फायदे क्या हैं? लांग डिस्टेंस रनर्स के लिए इन दोनों ट्रेनिंग सिस्टम में कौन सा ज़्यादा लाभकारी है?

 उत्तर:-
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसकी जानकारी हर रनर्स को अनिवार्य रूप से रहना चाहिए। यह लॉंग डिस्टेंस रनिंग का आधार है। इसलिए इस ब्लॉग को आप लोग अंत तक पढ़े। अगर आप लोगों ने इसे समझ लिया तो आपका रनिंग करने का तरीका बदल जायेगा।

चलिये शुरू में हम एरोबिक और एनारोबिक का मतलब समझ लें

 *एरोबिक :- एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है जिसमें ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है

 *एनारोबिक:-एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है जिसमें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है

 *एरोबिक और एनारोबिक रनिंग क्या होती हैं?

एरोबिक रनिंग वह होती है जिसमें रनिंग के दौरान हमारी मसल्स को एनर्जी प्रोड्यूस करने के पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती रहती है। इस प्रक्रिया में शरीर मे जो waste प्रोडक्ट निकलते हैं वह कार्बन डाइऑक्साइड और पानी रहते हैं।

एनारोबिक रनिंग वह होती है जिसमें रनिंग के दौरान हमारी मसल्स को एनर्जी प्रोड्यूस करने के पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती रहती है। इस प्रक्रिया में शरीर मे जो waste प्रोडक्ट निकलते हैं वह कार्बन डाइऑक्साइड और पानी  तो रहते ही हैं पर ज्यादा मात्रा में लेक्टिक एसिड  रहता है। लैक्टिक एसिड निकलने के कारण हमें थकान आने लगती है।


इनकी पहचान क्या है?

हम रन एरोबिक जोन में कर रहे हैं या एनारोबिक जोन में इसकी बहुत सरल पहचान है। अगर रन करते समय अपने फुल सेंटेंस में आराम से बातचीत कर पा रहे हैं तो हम एरोबिक जोन में रन कर रहे हैं। अगर हमको बोलने में दिक्कत हो रही है या बोल नही पा रहे हैं तो हम एनारोबिक जोन में रन कर रहे हैं। 
 
जब हम इजी रन या जॉगिंग करते हैं तो उस वक्त हम एरोबिक जोन में रहते हैं पर जब हम स्प्रिंट, इंटरवल ट्रेनिंग, टेम्पो रन या जब 5km और 10 km की रन फिनिश करने में पूरा जोर लगाते हैं तब हम एनारोबिक जोन में रहते हैं। शरुआत में एरोबिक में दौड पाना संभव है , क्युकी तेज दौडने से दिमाग थक जाता है , हड्डिया दर्द देती है धड़कने तेज हो जाती है और जब हम व्यावसायिक या मानसिक काम करते है तो थोड़ी परेशानी होती है , एक 40 साल के रनर को एनारोबिक जोन में पहुँचने में साल या उससे भी ज्यादा लग सकता है , यदि हम तेज दौड़ने की प्रैक्टिस भी करते है तो 48 घंटे रिकवरी में लगते है , इसको प्लानिंग और सही डाइट के साथ करना चाहिए। पेट कम करने में तेज दौड़ना सबसे बेहतर होता है।

आपमे से जिनके पास गार्मिन की घड़ी है उन लोगों ने देखा होगा कि रन के बाद जब वे अपना वर्कआउट सेव करते हैं तो आपके डेटा में ट्रेनिंग इफ़ेक्ट एरोबिक और एनारोबिक  में लिखा आता है। एक उदाहरण के लिए अगर ट्रेनिंग इफ़ेक्ट में 4.8 और एनारोबिक में 2.3 लिखा आ रहा है तो  इसका मतलब यह हुआ कि आप दोनों जोन में कितने रहे। 
इसको वॉच के हिसाब से थोड़ा और सरल करके बतलाता हूँ कि अगर आप आपकी HR के जोन 1 और 2 में है  अर्थात  आपकी HR के 50% से 70% तो आप एरोबिक जोन में रहे हैं जोन 3 का (HR का 70% से 80%) कुछ  एरोबिक जोन में और कुछ एनारोबिक जोन में रहता है इसलिए इसको लेक्टिक ट्रेशहोल्ड जोन कहा जाता है। HR की जोन 4 और 5 (80% से 100%) एनारोबिक जोन कहलाती हैं। 

एरोबिक और एनारोबिक जोन के फायदे क्या हैं?

 एरोबिक रनिंग के फायदे:-
 
टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट की बीमारी से पीड़ित लोगों को एरोबिक रन ही करना चाहिए। एरोबिक रन से निम्नलिखित फायदे हैं:-
वजन कम होता है
ब्लड प्रेशर कम होता है
आपका स्टैमिना बढ़ता है
थकान बहुत कम होती है
इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है 
आपका मूड अच्छा होता है

 एनारोबिक रनिंग के फायदे:-
 
आपकी हड्डियों को मजबूत होती हैं
आपका मसल्स मास बढ़ता है
एनर्जी बर्न का इफ़ेक्ट ज्यादा देर रहने से वजन भी कम होता है। 


 लांग डिस्टेंस रनर्स के लिए इन दोनों ट्रेनिंग सिस्टम में कौन सा ज़्यादा लाभकारी है?

यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है कि हमे किस एरोबिक जोन में रन करना चाहिए या एनारोबिक में। बहुत ही प्रसिद्ध किताब "80/20 रनिंग" के लेखक Matt Fitzgerald ने अपनी किताब में बतलाया है कि आपकी सप्ताह की 80 प्रतिशत रनिंग low इंटेंसिटी की अर्थात एरोबिक रनिंग होना चाहिए और 20% हाई इंटेंसिटी अर्थात एनारोबिक रनिंग होना चाहिए। दुनिया के जितने एलीट रनर्स है उनमें से लगभग सभी 80/20 के फार्मूले को फॉलो करते हैं।
अपने एक लेख में John Davis ने एक रिसर्च के बारे में बतलाया है, उस रिसर्च के निष्कर्ष अनुसार अगर आप सप्ताह में 80 प्रतिशत इजी रन करते हैं तो आपकी स्पीड 23 प्रतिशत बढ़ जाती है।* मुख्य कारण है कि इजी रन से आपका endurance और स्टैमिना बढ़ता है।
उक्त दोनों बातों के आधार पर *निष्कर्ष यह है कि आपको एरोबिक और एनारोबिक रनिंग दोनों करना है पर एरोबिक ज्यादा (सप्ताह में 80%) करना है।
 
में अपनी बात करू तो 2017 में दौड़ना शरू किया था और एक सप्ताह में तीन दिन 2 से 3 km तेज दौड़ने की ही कोशिश करता हु मतलब मेरा pace 5 से 6 बिच में ही रहता है , और संडे को 10 km एक घंटे में करने की कोशिश करता हु घर पहुंचने पर बहुत ज्यादा शारीरिक और मानसिक थकान रहती है दिल तेज धड़कता रहता है, भूख तेज लगती है , हल्का सरदर्द भी रहता है लेकिन यह एक नशे कि तरह है और सप्ताह भर के मानसिक तनाव को पूरी तरह से ख़त्म कर देता , सब कुछ अच्छा लगने लगता है , जिसको इसकी आदत हो जाये सारे नशे इसके आगे फीके है।  लगता है जैसे जन्नत मिल गयी हो।

 ध्यान रखें कि तेज दौड़ने का रास्ता धीरे दौड़ने वाले रास्ते से गुजरने के बाद आता है।


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